गोरखपुर में गैस सिलेंडर के लिए लगी लाइन बनी अखाड़ा, जमकर मारपीट

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

गोरखपुर की एक साधारण सुबह अचानक लोकल ड्रामा शो में बदल गई। गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी कतार में खड़े लोग पहले धूप से परेशान थे, फिर इंतजार से और आखिर में दो लोगों की बहस से.

पीपीगंज थाना क्षेत्र में स्थित आशीष ईडेन गैस सर्विस के बाहर लाइन धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी. लेकिन तभी दो लोगों के बीच हुई छोटी सी कहासुनी देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई।

कुछ सेकंड में ही माहौल ऐसा हो गया मानो सिलेंडर की जगह बॉक्सिंग मैच का टिकट बंट रहा हो. आसपास खड़े लोग बीच-बचाव करते रहे, लेकिन गुस्से का सिलेंडर पहले ही लीक हो चुका था।

लंबी लाइन और बढ़ता गुस्सा

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह से ही गैस एजेंसी के बाहर काफी भीड़ थी। कई लोग घंटों से लाइन में लगे हुए थे। ऐसे में जब कतार में खड़े दो लोगों के बीच किसका नंबर पहले है इस बात को लेकर बहस शुरू हुई, तो माहौल अचानक गर्म हो गया।

पहले आवाज ऊंची हुई, फिर हाथ उठे और कुछ ही क्षणों में दोनों लोग एक-दूसरे पर टूट पड़े। यह वही भारत है जहां लोग क्रिकेट मैच में हार-जीत पर बहस करते हैं… लेकिन अब एलपीजी लाइन भी नई बहस का स्टेडियम बनती जा रही है।

चश्मदीदों की नजर से घटना

लाइन में लगे लोगों ने बताया कि शुरुआत मामूली बहस से हुई थी. एक व्यक्ति का आरोप था कि दूसरा आदमी लाइन तोड़कर आगे आने की कोशिश कर रहा था। वहीं दूसरा पक्ष खुद को सही बता रहा था।

फिर वही हुआ जो अक्सर भारतीय कतारों में होता है. तर्क खत्म… तापमान शुरू। कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया, वरना मामला और बिगड़ सकता था।

व्यवस्था पर भी उठे सवाल

यह घटना सिर्फ दो लोगों की लड़ाई नहीं है. यह उस दैनिक दबाव की कहानी भी है जो आम आदमी झेल रहा है. घंटों लाइन में खड़ा रहना, सीमित काउंटर, और जल्दबाजी… इन सबका मिश्रण अक्सर ऐसी घटनाओं को जन्म देता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंसी के बाहर बेहतर लाइन मैनेजमेंट और व्यवस्था होनी चाहिए ताकि इस तरह के विवाद न हों।

गोरखपुर की यह घटना छोटी लग सकती है, लेकिन यह उस मानसिक थकान की तस्वीर है जो आम नागरिक रोज महसूस करता है. कभी बैंक की लाइन, कभी अस्पताल की, कभी गैस एजेंसी की…और हर जगह वही सवाल: “भाई साहब, नंबर किसका है?”

जब जवाब नहीं मिलता, तो बहस शुरू होती है.और बहस कभी-कभी मुक्केबाज़ी में बदल जाती है।

“7 घंटे हवा में… फिर ‘U-Turn’! लौट आई दिल्ली-मैनचेस्टर फ्लाइट”

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